रिपोर्टर राजकुमार शुक्ला छतरपुर जिले में कृषि बीज भंडारण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कार्य हुआ है, जिसका श्रेय जाता है जिले के D.D.A. पद पर कार्यरत डॉ. वी.पी. सूत्रकार को। इन्होंने छतरपुर में “देसी डिप्लोमा” कार्यक्रम की शुरुआत कर न केवल जिले का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और देशभर के कई राज्यों के युवाओं को रोजगार का अवसर प्रदान किया है। डॉ. वी.पी. सूत्रकार की इस अनोखी पहल के अंतर्गत अब तक 20 बैचों का संचालन सफलतापूर्वक किया जा चुका है, जिनमें से बैच 1 से 16 तक के प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए जा चुके हैं। बैच 17 प्रतीक्षा सूची में है, जबकि बैच 18 की 4 क्लास शेष हैं और बैच 19 व 20 वर्तमान में संचालित हो रहे हैं। इस डिप्लोमा कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के 15 जिलों के साथ-साथ 7 राज्यों – मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, कर्नाटक, हरियाणा और पश्चिम बंगाल – के प्रतिभागियों ने भाग लिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि छतरपुर जैसे जिले से शुरू हुआ यह प्रयास अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। इस कार्यक्रम में अब तक 800 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है, जिनमें से 12 महिला कैंडिडेट्स ने लाइसेंस प्राप्त कर स्वयं का रोजगार शुरू किया है। इससे महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा मिली है। संदीप पटेल, सरजू कुशवाह, सौरभ गुप्ता, ध्रुव गुप्ता, अनूप पटेल, अनीश जैन, गोविंद कुमार, राहुल गुमा, मनोज सोनू, राहुल दुबे, रोहित सिंह, जपलाल सिंह, राजदीप दुबेदी, रामस्वरूप पाठक, श्रीमती मंजू टिकोरिया आदि शामिल हैं, जिन्होंने देसी डिप्लोमा के माध्यम से स्थायी रोजगार प्राप्त किया है। डॉ. वी.पी. सूत्रकार के नेतृत्व में यह कोर्स केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने छतरपुर जिले को न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में एक मॉडल जिले के रूप में स्थापित किया है। उनका दूरदर्शी दृष्टिकोण, जन-कल्याण के प्रति समर्पण, और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता वाकई सराहनीय है। अब 30 जुलाई 2025 को भोपाल स्थित सिएट भोपाल में होने वाले विशेष कार्यक्रम में देसी डिप्लोमा की जानकारी का प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, जिससे और अधिक राज्यों और युवाओं को इस रोजगारपरक योजना से जोड़ा जा सके। डॉ. वी.पी. सूत्रकार जैसे अधिकारी समाज में एक प्रेरणा स्रोत बनते हैं, जो केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं निभाते, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी बनते हैं। छतरपुर को उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है, और आशा है कि उनकी यह मुहिम देशभर में रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई क्रांति लाएगी।


















