रिपोर्टर-संदीप कुमार वैष्णव, अजमेर, राजस्थान, घोषित कार्यक्रम के अनुसार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को 4 दिसंबर की शाम को साढ़े 6 बजे दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर पहुंचना था। आमतौर पर किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के निर्धारित कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होता है, लेकिन चार दिसंबर को पुतिन का जहाज कोई आधा घंटा विलंब से एयरपोर्ट पर पहुंचा और फिर सात बजे बाद पुतिन जहाज से बाहर आए। पुतिन के विलंब से आने के कारण भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा। एयरपोर्ट पर ही परंपरा के अनुरूप पुतिन को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाना था। इसके लिए सैन्य टुकड़ी भी मौजूद थी, लेकिन ऐन मौके पर गार्ड ऑफ ऑनर रद्द कर दिया गया। पुतिन ने मोदी के साथ भारतीय संस्कृति वाला एक लोकनृत्य मुश्किल से एक मिनट देखा और फिर दोनों नेता कार में बैठकर एयरपोर्ट से रवाना हो गए। न्यूज चैनलों पर पुतिन के विलंब से आने को लेकर चर्चा भी हुई, लेकिन किसी का भी ध्यान दिल्ली से चार सौ किलोमीटर दूर अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह में चल रही घटना की ओर नहीं गया। असल में अजमेर कलेक्टर की अधिकृत ईमेल आईडी पर चार दिसंबर की सुबह 11 बजे ही एक ईमेल प्राप्त हो गया था। इस ईमेल में लिखा गया कि कलेक्ट्रेट परिसर और ख्वाजा साहब की दरगाह में 4 आरडीएक्स लगाए गए हैं जो रूस के राष्ट्रपति पुतिन के भारत आने पर विस्फोट हो जाएंगे। इस ईमेल के मिलते ही देशभर की सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कलेक्ट्रेट और दरगाह परिसर को खाली करवा कर आरडीएक्स होने की जांच की गई। दोपहर तक यह सुनिश्चित हो गया कि दरगाह और कलेक्ट्रेट में कोई विस्फोटक सामग्री नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों ने भी राहत की सांस ली। लेकिन जानकारों का सवाल है कि क्या अजमेर में विस्फोट वाले ईमेल और पुतिन के विलंब से आने की घटना के बीच कोई तालमेल है? चूंकि ईमेल में पुतिन के आने पर विस्फोट की धमकी दी गई इसलिए शायद निर्धारित समय शाम साढ़े छह बजे को टाला गया। पुतिन का जहाज 4 सितंबर को शाम साढ़े छह के बजाए आधा घंटा विलंब से 7 बजे बाद पालम एयरपोर्ट पर उतारा। शायद दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां पुतिन के निर्धारित समय को टालना चाहती थी। वैसे भी ख्वाजा साहब की दरगाह में होने वाली छोटी से छोटी घटना का असर दुनियाभर में होता है। हालांकि अभी ईमेल भेजने वाले की कोई जानकारी नहीं मिली है, लेकिन कट्टरपंथी समय समय पर पुतिन को धमकी देते रहते है। भले ही अजमेर दिल्ली से 400 किलोमीटर दूर है, लेकिन पुतिन के आते ही विस्फोट की धमकी रूस की सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है। पुतिन से चार सौ किलोमीटर दूर विस्फोट को भी रूसी एजेंसियां ने गंभीर से लेती है। जिस व्यक्ति ने भी ख्वाजा साहब की दरगाह को उड़ाने की धमकी दी उसे यह भी पता था कि 4 दिसंबर को ही पुतिन दो दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंच रहे हैं। चूंकि धमकी में पुतिन का भी उल्लेख है, इसलिए देश की सुरक्षा एजेंसियां कुछ ज्यादा ही सतर्क है। एनआईए के अधिकारी भी पुतिन की यात्रा के मद्देनजर अजमेर पर निगरानी रखे हुए हैं। दरगाह को उड़ाने की धमकी तब मिली है, जब ख्वाजा साहब का सालाना उर्स का झंडा 17 दिसंबर को चढ़ेगा। चांद दिखने पर 6 दिवसीय धार्मिक उर्स की शुरुआत 21 दिसंबर से होगी। चूंकि उर्स में लाखों जायरीन आते हैं, इसलिए जिला प्रशासन ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी है। 4 दिसंबर को धमकी के बाद पूरे दरगाह परिसर को खाली करवाया गया। इसमें दरगाह के खादिमों ने भी पूरा सहयोग किया। अलबत्ता खादिमों ने धमकी के मद्देनजर उर्स में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाने की मांग की है।
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