रिपोर्टर- संदीप कुमार वैष्णव, जयपुर में एक प्राइवेट अस्पताल ने एक मृतक का शव महज इसलिए रोके रखा, क्योंकि उसके परिजन बकाया बिल चुकाने की स्थिति में नहीं थे। अब अस्पताल प्रशासन के इस कृत्य को क्या कहा जाए? अस्पताल प्रशासन ने तो अमानवीयता की सारी हदें ही पार कर दीं। क्या कहीं ऐसा कोई प्रावधान है कि यदि मृतक के परिजन बकाया बिल चुकाने की स्थिति में नहीं हों, तो शव को ही रोक लिया जाए। अरे धंधेबाजों, थोड़ी तो शर्म करो। लोग अस्पताल को देवालय और डॉक्टरों को भगवान मानते हैं। क्या यही तुम्हारा धर्म रह गया? यदि कोई परिजन बकाया बिल चुकाने की स्थिति में नहीं था, तो क्या तुम बकाया बिल माफ कर शव परिजन को नहीं दे सकते थे? उन परिजन से पूछो, उनके दिल पर उस समय क्या बीतती होगी, जब उनके परिवार का एक सदस्य दुनिया छोड़ देता है। इस मामले की जानकारी मिलने पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों और डॉक्टरों को लगातार फोन करते रहे, लेकिन एक ने भी उनका फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। हिमाकत तो देखो, एक कैबिनेट मंत्री फोन करें और अस्पताल प्रशासन का एक भी नुमाइंदा फोन नहीं उठाए। आखिर में डॉ. मीणा को अस्पताल पहुंच कर अधिकारियों और डॉक्टरों को फटकार लगानी पड़ी। जब डॉ. मीणा अधिकारियों से सवाल-जवाब कर रहे थे, तब भी यह लोग अनर्गल बातें कर गुमराह करने का प्रयास कर रहे थे। डॉ. मीणा का अस्पताल के नुमाइंदों से बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जब बिल नहीं भरने पर अस्पताल वालों ने शव रोक लिया तो जाहिर है परिजन ने हंगामा किया ही होगा। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ राज्य की भाजपा सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए। बताया जाता है कि मृतक को परिजन ने गंभीर बीमारी की हालत में इस अस्पताल में भर्ती कराया था, तो तीन-चार दिन में लाखों रूपए का बिल बना दिया गया। कुछ राशि तो चुका दी गई, लेकिन बाकी राशि देने के लिए इंतजाम नहीं हो पाया था। क्या गरीबों का इलाज केवल सरकारी अस्पतालों में ही हो सकता है? यदि सरकारी अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं, तो क्या कोई गरीब परिवार अपने परिजन को प्राइवेट अस्पताल में नहीं ले जा सकता है? क्या प्राइवेट अस्पताल इसी तरह मोटी-मोटी राशि के बिल बनाकर लोगों का खून चूसते रहेंगे? जिस तरह सरकार कोचिंग संस्थानों पर लगाम लगाने के लिए विधेयक लाई है, उसी तरह इन प्राइवेट अस्पतालों पर कड़ाई से लगाम लगाने के लिए ऐसा विधेयक लाना चाहिए, जिससे आम आदमी को प्राइवेट अस्पताल इस तरह लूट नहीं सके और इस तरह की स्थिति आने पर ऐसी हरकत नहीं की जा सके।
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