रिपोर्टर-संदीप कुमार वैष्णव, 28 नवंबर को राजस्थान लोक सेवा आयोग की सदस्य श्रीमती संगीता आर्य ने अपना इस्तीफा राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े को सौंप दिया है। श्रीमती आर्य का कार्यकाल 13 अक्टूबर 2026 तक था, लेकिन विभिन्न परीक्षाओं में हुई गड़बडिय़ों और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच के चलते श्रीमती आर्य को मजबूर होकर सदस्य के पद से इस्तीफा देना पड़ा। संगीता आर्य के कामकाज को लेकर पूर्व में हाईकोर्ट ने भी प्रतिकूल टिप्पणी की थी, तब आयोग की सदस्य श्रीमती मंजू शर्मा (कवि कुमार विश्वास की पत्नी) ने तो इस्तीफा दे दिया, लेकिन संगीता आर्य ने नैतिकता नहीं दिखाई। अब जब एसीबी ईओ भर्ती के मामले में संगीता आर्य से पूछताद कर रही है, तब एसीबी के सवालों से घबराकर संगीता आर्य ने इस्तीफा दिया है। एसीबी ने गत 10 नवंबर को संगीता आर्य को जयपुर मुख्यालय पर तलब किया था, लेकिन तब आयोग में व्यस्त रहने के कारण संगीता आर्य उपस्थित नहीं हुई। सूत्रों की माने तो एसीबी ने फिर से तलब किया, लेकिन इससे पहले ही संगीता आर्य ने आयोग के सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया। यह बात अलग है कि आर्य ने हर संभव कोशिश की वे अपना कार्यकाल पूरा करे, लेकिन एसीबी का दबाव इतना बढ़ा की उन्हें सदस्य का पद छोड़ना ही पड़ा। संगीता आर्य की आयोग में सदस्य के तौर पर अक्टूबर 2020 में तब नियुक्ति हुई थी, जब उनके पति निरंजन आर्य राजस्थान के मुख्य सचिव थे। उस समय अशोक गहलोत कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री थे। संगीता आर्य की एकमात्र योग्यता यह थी कि वह मुख्य सचिव की पत्नी है। सब जानते हैं कि अशोक गहलोत की सरकार को बचाने में निरंजन आर्य ने कैसी कैसी भूमिका निभाई। मुख्य सचिव के पद पर रहते हुए निरंजन आर्य की नीयत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्य ने गत विधानसभा का चुनाव कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर सोजत से लड़ा। यह बात अलग है कि आर्य चुनाव हा रगए। कहा जा सकता है कि संगीता आर्य के इस्तीफे के साथ ही पूर्व सीएम गहलोत का एक और विकेट गिर गया है। श्रीमती मंजू शर्मा की नियुक्ति भी गहलोत ने ही की थी। इसी प्रकार गिरफ्तार होकर जेल में पड़े सदस्य बाबूलाल कटारा की नियुक्ति भी गहलोत ने ही की थी। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने अध्यक्ष रहे संजय श्रोत्रिय पर भी टिप्पणी की। उन्हें भी गहलोत के शासन में ही नियुक्ति मिली। आयोग में अभी भी गहलोत शासन में नियुक्त सदस्य कैलाश मीणा, कर्नल केसरी सिंह राठौड़ और प्रोफेसर अयूब कार्यरत है। केसरी सिंह राठौड़ की नियुक्ति के तुरंत बाद ही अशोक गहलोत ने खेद प्रकट कर दिया था। गहलोत ने स्वीकार कि उन्होंने केसरी सिंह राठौड़ की पृष्ठभूमि जाने बगैर ही नियुक्ति करवा दी। तब गहलोत केसरी सिंह से इस्तीफा लेना चाहते थे, लेकिन वे उपलब्ध ही नहीं हुए। अब भाजपा सरकार में भी अध्यक्ष यूआर साहू के साथ साथ पूर्व आईपीएस हेमंत प्रियदर्शी, शिक्षाविद अशोक कलेवार और डॉ. सुशील बिस्सू की सदस्य के पद पर नियुक्त हो चुकी है। यानी आयोग में अध्यक्ष सहित चार सदस्य भाजपा और तीन सदस्य कांग्रेस शासन के हैं। आयोग में अध्यक्ष सहित दस सदस्यों का प्रावधान है। ऐसे में मौजूदा समय में तीन पद रिक्त हैं।
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